सितम्बर 2006 में पहले नवरात्रा के दिन जयपुर की धरती पर राजपूतकरणी सेना का परचम लहराया।
यह 11 उद्देश्यों को लेकर बनी थी। यह उद्देश्य निम्न है :-
1. किसी भी राजपूत के साथ रानीतिक व सामाजिक द्वेष के चलते किसी भी तरह का दुव्यर्वहार के होने पर उसका विरोध।
2. इतिहास के साथ छेड़छाड़ के विरोध में आवाज बुलन्द करना।
3. ऐतिहासिक पुरूषों के नाम के साथ जुड़े किसी भी विवाद के विरूद्ध आवाज बुलन्द करना।
4. राजपूत एकता को प्रति जागृति।
5. सामाजिक समरसता बनाये रखने के लिए 36 कोमों के साथ गठजोड़।
6. किसी भी पार्टी से सम्बनिधत राजपूत जाति के व्यकित का साथ व समर्थन करना।
7. राजपूत जाति की महिलाओं को शिक्षा व स्वावलम्बन के लिए प्रेरित करना।
8. राजपूत युवा वर्ग को संगठित करना।
9. समय समय पर रक्तदान व रक्तदान जैसे सामाजिक कार्यों के लिए समाज को प्रेरित करना।
10. समय समय पर राजपूत समाज के महापुरूर्षों की जयंतियों का आयोजन करना।
11. आरक्षण के मुददे पर समाज की आवाज को बुलन्द करना।